राहुल गांधी को भी आता है गुस्सा?

 राहुल गांधी को भी आता है गुस्सा?

भारत की राजनीति में लगभग पचास सालों से राज कर रहे गांधी परिवार के युवराज राहुल गांधी को भी गुस्सा आता है तो देष की ‘‘बेचारी जनता‘‘ को अब खुष हो जाना चाहिए कि कांग्रेस के युवराज षायद उनकी दुर्दषा सहन नहीं कर पा रहे हैं और जनता की समस्या को समाप्त करनेे के लिए कुछ प्रयास करेंगे। अरे भाई अपने दिमाग पर इतना जोर मत डालिये। कांग्रेस के युवराज को सिर्फ उत्तर प्रदेष की जनता की दुर्दषा देखकर गुस्सा आता है। सवाल यह है कि क्या पूरे देष में उत्तर प्रदेष की जनता ही बदहाली में अपना जीवन यापन कर रही है। नहीं न? तो फिर राहुल गांधी को सिर्फ उत्तर प्रदेष की जनता की बदहाली को देखकर ही क्यों गुस्सा आ रहा है?। उन्हें उस रिपोर्ट पर गुस्सा नहीं आता जिसमें 32 रूपये प्रतिदिन पाने वाले को धनी आदमी मान लिया जाता है?। उन्हें देष में हो रहे करोड़ों रूपयों के घोटालों पर गुस्सा नहीं आता?। उन्हें देष में बढ़ रही महंगाई पर गुस्सा क्यों नहीं आता जिसकी चक्की में पीस कर देष की जनता छटपटा रही है।


   राहुल गांधी के मन में जब भी जनता के लिए प्यार उमड़ता है तो वे जनता के दुख दर्द को बांटने के लिए बिना किसी सूचना के उत्तर प्रदेष के दौरे पर निकल पड़ते हैं। यहां आने के बाद राहुल गांधी सीधे दलित बस्तियों में जाते है और किसी दलित के साथ बैठकर भोजन करते और वहीं पड़ी चारपाई पर बिना बिस्तर के सोते हैं। राहुल गांधी जिस दलित के घर में ठहरते हैं उसको किसी प्रकार का कोई लाभ नहीं होता है। लेकिन राहुल गांधी को इसका भरपूर लाभ मिलता है। सुबह अखबारों की हेडलाइन राहुल गांधी के दौरे के बारे में ही होती है।


   दरअसल उत्तर प्रदेष की राजनीति दिल्ली की सत्ता में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है और इतिहास पर नजर डाला जाय तो देष के सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री भी उत्तर प्रदेष की जमींन और राजनीति से जुडे़ मिलेंगे। और तो और खुद राहुल गांधी के पूर्वजों की कर्मस्थली उत्तर प्रदेष ही रही है। उन्हें इस बात का भी अंदाजा है कि लगभग दो दषक से उत्तर प्रदेष में कांग्रेस पार्टी किस स्थिति में है।


      राहुल गांधी का प्रदेष में होने वाला दौरा प्रदेष की सत्ता में फिर से वापस लौटने की ललक का नतीजा हैं। कांग्रेस के पुराने वोट बैंक दलितों पर अपना निषाना साधकर राहुल गांधी मिषन 2012 को पूरा करने में जुट गये हैं। प्रदेष में पार्टी की दुर्दषा से वाकिफ राहुल गांधी प्रदेष में पार्टी की पुरानी साख वापस लौटने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। जनता के बीच चैपाल लगाकर प्रदेष सरकार के हर मोर्चे पर विफल होने की बात छेड़कर राहुल गांधी कांग्रेस के लिए वोट भी मांगते है और वे कहते हैं कि केंद्र और प्रदेष की सरकार एक ही पार्टी की होगी तो देष और प्रदेष का विकास काफी तेजी से होगा।


   सवाल है कि जनता इस बात पर कैसे विष्वास कर ले कि राहुल गांधी जो भी कह रहे हैं वह सच होगा। हाल के दिनों में देष में भ्रश्टाचार के खुलासे, बढ़ रही महंगाई और भ्रश्ट राजनीति को देखकर जनता का अब राजनेताओं से विष्वास उठने लगा है। उन्हें इस बात का भी एहसास होने लगा है कि आज के नेता सिर्फ सत्ता के लिए बड़े-बडे़ वादे तो करते हैं लेकिन जब उसके पूरा करने का समय आता है तो वे कैसे मौन साध लेते हैं। देष की जनता अभी यह नहीं भुल पायी है कि यूपीए की दूसरी बार सरकार बनने पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि 100 दिनों के अंदर ही महंगाई पर काबू पा लिया जायेगा। इसका क्या नतीजा हुआ यह पूरा देष जानता है।


    राहुल गांधी का उत्तर प्रदेष में दलित प्रेम क्या रंग लायेगा यह तो आगामी विधानसभा चुनाव में स्पश्ट हो जायेगा। लेकिन अगर राहुल गांधी सिर्फ उत्तर प्रदेष की जनता की दुर्दषा को देखकर गुस्सा होने की बजाय महंगाई, भ्रश्टाचार जैसी समस्याओं से निजात पाने के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलाकर गंभीरता से विचार करते तो षायद देष की जनता का कुछ भला हो जाता। 


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